समस्याएं इतनी ताक़तवर नहीं हो सकती जितना हम इन्हें मान लेते हैं ,
कभी सुना है ,, कि "अंधेरों ने सुबह ही ना होने दी हो"
"एक ही जगह ऊर्जा लगाने की शक्ति"
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कभी सुना है ,, कि "अंधेरों ने सुबह ही ना होने दी हो"
"एक ही जगह ऊर्जा लगाने की शक्ति"
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बचपन में एक काम हर कोई करता है लैंस से सूरज की किरणों के जरिये कागज में आग लगाना. शायद याद होगा हम सभी को. क्या कभी हमने सोचा है कि अगर हम कागज को बिना लैंस के सूरज की किरणों के सामने रखते हैं तो वो नहीं जलता. जी हाँ जलता ही नहीं।
क्योँ ????
क्योँकि सूरज की किरणें पूरी पृथ्वी पर फैली हुई होती हैं. पर मित्रों जब हम इन्ही फैली हुई किरणों को लैंस के जरिये "एक जगह इकट्ठा" करते हैं तो आग लग जाती है.
मित्रों इसी तरह "अपने को सूर्य" और "अपने विचारों को किरण" समझिए. अब देखिये कि जब तक हमारे विचार रूपी किरण इधर उधर भटकते रहेंगे तब तक हमारे काम सफल नहीं हो पाएंगे,
हमने एक बात हमेशा देखी है कि जब भी हम इंसानों ने अपनी सारी की सारी किरण रूपी विचार एक जगह पर लगाए तो हमने बड़े से बड़े काम को चुटकियों में हल कर लिया.
क्योँ ????
क्योँकि सूरज की किरणें पूरी पृथ्वी पर फैली हुई होती हैं. पर मित्रों जब हम इन्ही फैली हुई किरणों को लैंस के जरिये "एक जगह इकट्ठा" करते हैं तो आग लग जाती है.
मित्रों इसी तरह "अपने को सूर्य" और "अपने विचारों को किरण" समझिए. अब देखिये कि जब तक हमारे विचार रूपी किरण इधर उधर भटकते रहेंगे तब तक हमारे काम सफल नहीं हो पाएंगे,
हमने एक बात हमेशा देखी है कि जब भी हम इंसानों ने अपनी सारी की सारी किरण रूपी विचार एक जगह पर लगाए तो हमने बड़े से बड़े काम को चुटकियों में हल कर लिया.
जी हाँ मित्रों हमें ये समझना पड़ेगा कि जब भी हम कोई काम करें तो उसे proper तरीके तक लाने के लिए अपना तन, मन और जूनून पूरी तरह लगा दें, सफलता मिलने से हमें कोई नहीं रोक सकता.
मित्रों उस काम के लिए इस कदर जुनूनी हो जाएँ जैसे पानी के अन्दर हम सांस लेने के लिए तड़प जाते हैं.
मित्रों अपनी सारी की सारी किरण रूपी ऊर्जा एक जगह पर ले कर कोई भी काम करें.
जिस प्रकार लैंस के जरिये सूर्य की किरणों ने एक जगह आ कर कागज में आग लगा दी वैसे ही हम अपने अंदर की सारी की सारी ऊर्जा एक जगह लगा कर अपने भारत के स्वर्णीम गौरव को वापिस लाकर एक दिन विश्व गुरु अवश्य बनेंगे.
मित्रों किसी ने सही कहा है :-
समस्याएं इतनी ताक़तवर नहीं हो सकती जितना हम इन्हें मान लेते हैं ,
कभी सुना है ,, कि
"अंधेरों ने सुबह ही ना होने दी हो"
जय हिन्द
जय भारत
मित्रों उस काम के लिए इस कदर जुनूनी हो जाएँ जैसे पानी के अन्दर हम सांस लेने के लिए तड़प जाते हैं.
मित्रों अपनी सारी की सारी किरण रूपी ऊर्जा एक जगह पर ले कर कोई भी काम करें.
जिस प्रकार लैंस के जरिये सूर्य की किरणों ने एक जगह आ कर कागज में आग लगा दी वैसे ही हम अपने अंदर की सारी की सारी ऊर्जा एक जगह लगा कर अपने भारत के स्वर्णीम गौरव को वापिस लाकर एक दिन विश्व गुरु अवश्य बनेंगे.
मित्रों किसी ने सही कहा है :-
समस्याएं इतनी ताक़तवर नहीं हो सकती जितना हम इन्हें मान लेते हैं ,
कभी सुना है ,, कि
"अंधेरों ने सुबह ही ना होने दी हो"
जय हिन्द
जय भारत
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