सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे,
नज़र को बदलो नज़ारे बदल जायेंगे,
अरे ऐ इंसान, जरा एक बार अपनी जबां को तो बदलो,
हम सारे के सारे बदल जायेंगे।
" अधिकार V/s कर्तव्य "
------------------------
पैदा होने से लेकर और समझदार होने तक और उसके बाद भी हमारे माता पिता हमें अपना "कर्तव्य" समझ कर पालते है. समझदार होने के बाद हम अपने माता पिता को कहते हैं कि जो कुछ भी आपने हमारे लिए किया है,
वो तो हमारा "अधिकार" है. अब जब हमने ये कह ही दिया है तो बताइए हमारा अपने माता पिता के लिए क्या क्या "कर्तव्य" हैं ?
नज़र को बदलो नज़ारे बदल जायेंगे,
अरे ऐ इंसान, जरा एक बार अपनी जबां को तो बदलो,
हम सारे के सारे बदल जायेंगे।
" अधिकार V/s कर्तव्य "
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पैदा होने से लेकर और समझदार होने तक और उसके बाद भी हमारे माता पिता हमें अपना "कर्तव्य" समझ कर पालते है. समझदार होने के बाद हम अपने माता पिता को कहते हैं कि जो कुछ भी आपने हमारे लिए किया है,
वो तो हमारा "अधिकार" है. अब जब हमने ये कह ही दिया है तो बताइए हमारा अपने माता पिता के लिए क्या क्या "कर्तव्य" हैं ?
कभी सोचा है, जरा सोचिये ? आज "अधिकार" वाली बात जो हमने अपने माता पिता से बोली, तो क्या यही बात हमारे बच्चे हम से नहीं बोलेंगे, जरा ये सोच कर तो देखिये ?
आज की तारीख में हम बहुत ही ज्यादा Self Centered हो गए हैं और ये सोचते हैं की "हम और हमारे बच्चे", इस वाक्य को ध्यान से समझिएगा, " हम और हमारे बच्चे . अब सोचिये, आगे आने वाले समय में क्या हमारे बच्चे भी हमारी इसी सोच को लेकर नहीं चलेंगे - " हम और हमारे बच्चे ".
हम इंसानों को बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी होती है कि हम अपने बच्चों के लिए इतना कर दें कि वो भी बुढ़ापे में हमें देखें,
पर हम इंसान इस बात को भूल जाते हैं कि हम ये सोच खुद अपने बच्चों में डालते हैं यानि "हम और हमारे बच्चे". वो भी अगर हमारी ही राह पर चलते है तो इसमें गलत क्या है,
हम लोगों को बिलकुल भी बुरा नहीं लगना चाहिए. हम ही उन्हें Forward Model सीखा रहें हैं, हम सिर्फ और सिर्फ एक ही कीमत में अपने बच्चों से उम्मीद कर सकते हैं, जब हम खुद Reverse Model Follow करें यानि "जिस तरह, जिस जूनून के साथ हम अपने बच्चों को "कर्तव्य" के साथ पालते हैं उसी जूनून के साथ हम अपना "कर्तव्य" समझकर अपने माता पिता का भी ख्याल रखें", न कि सिर्फ ये सोचें की जो कुछ उन्होंने हमारे लिए किया है वो हमारा "अधिकार" था और हमें मिलना ही चाहिए था.
मित्रों हम जहाँ हैं जैसे हैं अपने "अधिकार के कारण नहीं" बल्कि "उनके कर्तव्यों के कारण हैं", ये एक कटु सत्य है.
. मित्रों, 9 महीने अपने गर्भ में रखने के बाद जब दुखी माँ की बददुआएं निकलती हैं तो इंसान सिर्फ हिलता नहीं, उसकी जिंदगी में भूकम्प आ जाता है
मान कर चलिए हमें अपनी सोच "हम और हमारे बच्चे" से बदलकर "हम, हमारे माता पिता और हमारे बच्चे" किसी भी हाल में करनी ही होगी.
किसी ने सही कहा है :-
गलतफहमियों के सिलसिले इस कदर फैले हैं,
कि हर ईंट सोचती है कि दीवार उसी से है.
आज की तारीख में हम बहुत ही ज्यादा Self Centered हो गए हैं और ये सोचते हैं की "हम और हमारे बच्चे", इस वाक्य को ध्यान से समझिएगा, " हम और हमारे बच्चे . अब सोचिये, आगे आने वाले समय में क्या हमारे बच्चे भी हमारी इसी सोच को लेकर नहीं चलेंगे - " हम और हमारे बच्चे ".
हम इंसानों को बहुत बड़ी ग़लतफ़हमी होती है कि हम अपने बच्चों के लिए इतना कर दें कि वो भी बुढ़ापे में हमें देखें,
पर हम इंसान इस बात को भूल जाते हैं कि हम ये सोच खुद अपने बच्चों में डालते हैं यानि "हम और हमारे बच्चे". वो भी अगर हमारी ही राह पर चलते है तो इसमें गलत क्या है,
हम लोगों को बिलकुल भी बुरा नहीं लगना चाहिए. हम ही उन्हें Forward Model सीखा रहें हैं, हम सिर्फ और सिर्फ एक ही कीमत में अपने बच्चों से उम्मीद कर सकते हैं, जब हम खुद Reverse Model Follow करें यानि "जिस तरह, जिस जूनून के साथ हम अपने बच्चों को "कर्तव्य" के साथ पालते हैं उसी जूनून के साथ हम अपना "कर्तव्य" समझकर अपने माता पिता का भी ख्याल रखें", न कि सिर्फ ये सोचें की जो कुछ उन्होंने हमारे लिए किया है वो हमारा "अधिकार" था और हमें मिलना ही चाहिए था.
मित्रों हम जहाँ हैं जैसे हैं अपने "अधिकार के कारण नहीं" बल्कि "उनके कर्तव्यों के कारण हैं", ये एक कटु सत्य है.
. मित्रों, 9 महीने अपने गर्भ में रखने के बाद जब दुखी माँ की बददुआएं निकलती हैं तो इंसान सिर्फ हिलता नहीं, उसकी जिंदगी में भूकम्प आ जाता है
मान कर चलिए हमें अपनी सोच "हम और हमारे बच्चे" से बदलकर "हम, हमारे माता पिता और हमारे बच्चे" किसी भी हाल में करनी ही होगी.
किसी ने सही कहा है :-
गलतफहमियों के सिलसिले इस कदर फैले हैं,
कि हर ईंट सोचती है कि दीवार उसी से है.
Nt COmputer Muchhel

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